Biography of Chandrashekhar Azad in Hindi 2020
Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

Biography of Chandrashekhar Azad in Hindi 2020

Biography of Chandrashekhar Azad in Hindi-

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निवेदन:- घर पे रहे ,सुरक्षित रहे। ……

Biography of Chandrashekhar Azad in Hindi
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” आजाद थे , आजाद है , आजाद रहेंगे “

ये शब्द थे भारत के वीरपुत्र श्री चंद्रशेकर आजाद के  , एक ऐसे शक्श जिसने अंग्रेजो के हुकूमत को हिला कर रख दिया था | एक ऐसा  शक्श जिसपे कई लाखो का इनाम था , एक ऐसा शक्श जिसे मारने के लिए एक पूरी मिलिट्री आई थी |

फिर भी आज़ाद को ज़िंदा नहीं पकड़ पायी | परन्तु इन सबके वावजूद आज उनकी उतनी चर्चा नहीं होती जितनी किसी और महावीरों की होती है , ना सिर्फ वह एक वीरपुत्र थे बल्कि कई बड़े-बड़े अंग्रजो को ऐकले ही धराशाई कर देश को आज़ादी दिलाने में भी बहुत अहम् भूमिका निभाई थी |

आज ऐसे ही एक महावीर की बायोग्राफी हम पढ़ने जा रहे है | कैसे मात्र 13 साल की उम्र अपना घर छोड़ा ?  क्यों अपना नाम तिवारी से आज़ाद रखा ? ऐसे कई और सवालों के जबाब आज आपको जानने को मिलेगा , तो इस पोस्ट को पूरा पढ़े ताकि आप इन सभी चीजों के बारे में जान सके |

तो चलिए जानते है भारत के वीरपुत्र चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में –

शुरआती जीवन

श्री चंद्रशेकर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई , 1906 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बदरका गांव में हुआ , आज़ाद के पैदा होने के कुछ सालो बाद इस गांव में एक बड़ा अकाल पढ़ गया जिस वजह से उनके पिताजी ने फिर इस गांव को छोड़ मध्य प्रदेश के गांव धिमारपुरा में आ गए और यहाँ अपने परिवार के साथ रहने लगे |

आज़ाद का असली नाम चंद्रशेखर तिवारी था | वह एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे अपने पिता के तीसरी पत्नी के पहले बच्चे थे | उनके पिता की पहली दो पत्नियां बहुत युवा अवस्था में ही दुनिया छोड़ गई थी | जिस वह से उन्होंने फिर तीसरी शादी की और उन्हें उनसे एक पुत्र प्राप्त हुआ , जोकि थे श्री चंद्रशेखर तिवारी |

उनके पिता का नाम सीताराम तिवारी  था , जोकि अंग्रेजो की सेना में एक सिपाही थे | वही उनकी माँ का नाम श्रीमती जगरानी देवी तिवारी था , जोकी एक ग्रहणी थी  और वह चंद्रशेखर आज़ाद को एक संस्कृत स्कॉलर बनते देखना चाहती थी |

चंद्रशेखर  आज़ाद को बचपन से ही किताबे पढ़ने  का बड़ा शौख था , वह बहुत से क्रांतिवीरो की किताबे पढ़ा करते और अपने दोस्तों को भी क्रांतिवीर बनने की प्रेणना दिया करते थे | वह बचपन से ही एक क्रांतिवीर बनना चाहते थे |

कैसे आम खाने की वजह से उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था ?

तो हुआ यूं की जब चंद्रशेखर आज़ाद मात्र 13 साल के थे तब उन्होंने एक बगीचे से कुछ आम थोड़ खाये थे , तो उस बगीचे के मालिक ने ये बात उनके पिताजी से कह दिया , जिसके बाद उनके पिताजी ने उन्हें खूब डांटा और उनसे ये कहा की जाओ और उस बगीचे के मालिक से माफ़ी मांग के आओ ,

जिसपर की उन्होंने ये कहा की मैं उस अंग्रेज जोकि उस बगीचे का मालिक है , उससे माफ़ी क्यों मांगू मैंने कोई पाप थोडिये किया है | इस बात को सुन उनके पिताजी ने उन्हें ये बोला की जब तक तुम उस आदमी से माफ़ी नहीं मानगोगे तब तक तुम इस घर में नहीं आ सकते हो | जिसके बाद फिर चंद्रशेखर आज़ाद ने अपना घर मात्र 13 साल की उम्र में छोड़ दिया था |

 कैसे आज़ाद बर्तन माज कर अपना पेट पाला करते थे ?

जब उन्होंने अपना घर छोड़ा तो उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और ना ही कोई ओर सहारा था , इसी के चलते उन्होंने अपने घर से 40 कोश दूर एक रेलवे स्टेशन से मुंबई जाने वाली एक ट्रैन पकड़ी | जिसके बाद फिर वह मुंबई आ गए , यहाँ आने के बाद उन्हें बहुत भूख लगी जिसके चलते फिर उन्होंने रेलवे स्टेशन के पास मजूद एक होटल में गये जहा फिर उन्हें एक नौकरी मिली |

वहा वह जूठे बर्तनो को धोकर पैसे कमाया करते थे जिससे की वह अपना पेट पाल सके | कुछ महीनो तक ये काम करने के बाद वह बनारस आ जाते है  जहा फिर वह अपनी पढाई फिर से शुरू करते थे | यहाँ वह काशी विद्यापीठ कॉलेज में अपना एडमिशन लेते है और यही रहते हुए वह फिर अपनी पढाई पूरी करते है |

एक बार किसी को मारा तो वह बिलकुल बेहोस हो गया ?

यहाँ में किसी अंग्रेज को मरने की बात नहीं कर रहा हूँ |  उन्होंने एक ऐसे इंसान को मारा था , जो बस थोड़ा ज़िद्दी था | जिसकी वजह से चंद्रशेकर आज़ाद को भी बाद में बड़ा दुःख हुआ | हुआ कुछ ऐसे की जब वह अपनी पढाई पूरी कर रहे तो उन्हें पहवनी का भी शौख छड़ गया जिसके बाद फिर वह पहवानो की तरह ही कसरत किया करते थे जिससे की उनका शरीर किसी पत्थर की तरह सख्त हो गया था |

तो एक दिन उन्होंने अपने ही किसी दोस्त को किसी दूसरे के साथ बहस करते देखा , जिससे की वह उसे समझाने लगे पर वह कुछ ना समझा , जिसके बाद फिर उन्होंने उसे एक तमाचा जड़ दिया | और वह बिलकुल बेहोस हो गया | जिसके बाद फिर उन्हें  इस गलती का अहसास हुआ की जिसे उन्होंने मारा है वह एक निर्दोष व्यक्ति था | वैसे चंद्रशेखर आज़ाद उसूलो के बड़े पक्के इंसान थे |वह किसी भी निर्दोष को मारे जाने पर दुखी हो जाया करते थे और अगर कोई निर्दोषो पर जुल्म कर रहा है तो वह उसे छोड़ते भी नहीं थे |

कैसे एक गुंडे से आज़ाद कराया बनारस को आज़ाद ने ?

यह भी उसी समय की बात है जब वह अपनी पढाई जारी रखे बनारस में पढ़ रहे थे | जहा आज़ाद रह रहे थे वहा के लोगो के बीच एक गुंडे का बड़ा खौफ था , जोकि लड़की को छेड़ना  या वहा के दूकानदारो से सामान लूटना  या फिर किसी को भी बेवजह पीट देना |

इन सब से वहा  के लोग बड़े परेशान थे , तो एक दिन आज़ाद वहा के ही  एक सब्ज़ी मंडी में जाते है जहा वह गुंडा आता है  और फिर वह एक लड़की को छेड़ने लगता है , फिर वह उस लड़की को कुछ अपशब्द  कहता है और लड़की इसके जबाब में कुछ भी नहीं कहती है |

आज़ाद ये सब देख उस गुंडे के पास जाते है और कहते है की ” इसका हाथ छोड़ दे ” बिलकुल किसी फिल्म के हीरो की तरह , पर वह गुंडा उस लड़की का हाथ नहीं छोड़ता है | उसके बाद तो आज़ाद अपना हाथ उसके गले में देकर उसे जमीन पे पटक देते है | और फिर क्या वह गुंडा उनके डर से वहा फिर कभी नजर नहीं आता है |

अभी एक हैरान करने वाली बात आपको बताना बाकी है की जब वह यह सब कारनामे कर रहे थे ना वह मजह 16 साल के ही थे | उनमें किसी चीज का भी डर मजूद ही नहीं था और फिर अंग्रेजो की गुलामी ये तो कतई मजूर नहीं था |

काकोरी कांड क्यों किया गया था  ? Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

कई इतिहासकार ये मानते है की वह “काकोरी कांड” ही था जिसने की देश में मजूद कई क्रांतिकारियों को फिर से जगा दिया था | काकोरी कांड ही क्यों ? तो वो इसीलिए क्युकी जब महात्मा गाँधी ने अपना  असहयोग आंदोलन वापिस ले लिया तो कई क्रांतिवीरो के मन में निराशा छा गयी , जिसे फिर  उभारने में काकोरी कांड ने ही सबसे बड़ी भूमिका निभाई |

 अच्छा भाई ये तो बताओ की काकोरी कांड था क्या ? तो ये एक ट्रैन की डकैती थी , जिसमें की आज़ाद के साथ कई और लोग भी शामिल थे | अच्छा तो  ये कांड हुआ ही क्यों ? तो ये इसीलिए हुआ क्युकी आज़ाद जिस फौज में शामिल थे  “हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन’ (एचआरए) , उनका मकसद ये ट्रैन डकैती इसीलिए था की वह उस सरकारी खजाने को लूट उनसे अपने फौज के लिए हथियार खरीद सके जिससे की उनके फौज को अंग्रेजो से लड़ने में मदद मिले |

तो यही कांड ” काकोरी कांड ” के नाम से जाना जाता है | आगे भी उनके नाम से कई कांड हुये जिनमें असेंबली बम कांड, लाला लाजपत राइ की मौत का बदला जैसे कई और कांड शामिल है | वह भारत के क्रांतिवीरो का एक चेहरा बन गए थे |

कैसे नाम पड़ा आज़ाद ?जानिए – Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

यहाँ में आपको थोड़ा पीछे ले जाउगा जब आज़ाद महज 15 साल के थे , तब उन्होंने जल्लियावाला बाग़ कांड के खिलाफ महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन में कई और भी छात्रों के साथ इस आंदोलन में शामिल हुए थे , उसी आंदोलन के द्वारान उन्हें 15 दिन की जेल हो गयी , जिस पर की एक दिन उन्हें कोट में भी पेश किया गया ,

वहा मजूद जज ने जब उनसे उनका नाम पुछा तो उन्होंने कहा की ” मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा पता जेल है” इससे जज भड़क गए और आजाद को 15 बेंतो की सजा सुनाई गई, यही से उनका नाम आजाद पड़ गया ।

कैसे अल्फ्रेड पार्क में खुद को मार आज़ाद , आज़ाद रह गए ? Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

वैसे तो आज़ाद की तलाश वहा के सिपाही तब से कर रहे थे जब से उन्हें काकोरी कांड में शामिल पाया गया था , पर आज़ाद कहा किसी के हाथ आने वाले थे | वह तो बिलकुल अपना प्रण लिए की आजाद थे , आजाद है , और आज़ाद ही रहेंगे , इसे लेकर वह कभी किसी के हाथ नहीं आये , पर जब उनके सभी साथिओ को जेल में बंद कर दिया गया , जिसमें की भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु भी शामिल थे  |

तब उनके लिए थोड़ा मुश्किल हो गया अंग्रेजो से बचना और फिर एक दिन अल्फ्रेड पार्क में अपने किसी साथी से मिलने आये आज़ाद को अंग्रेजो के मिलिट्री द्वारा घेर लिया गया , अपने आखिरी पालो तक वह वीरो की तरह ही लड़े और जब उनके बन्दुक में 1 गोली बची रह गई तो उन्होंने खुद को ही वह गोली मार ली , जिस वजह ही आज़ाद ज़िंदा अंग्रेजो के हाथ नहीं आये |

जानिए चंद्रशेखर  आज़ाद के बारे में कुछ बहुत ही जबरदस्त फैक्ट्स – Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

  • चंद्रशेखर आज़ाद का अलसी नाम चंद्रशेखर तिवारी था |
  • चंद्रशेखर आज़ाद ने मजह 13 साल की  उम्र में ही अपना घर छोड़ दिया था |
  • चंद्रशेखर आज़ाद ने अपना पेट पालने के लिए होटलो में बर्तन भी माजे है |
  • चंद्रशेखर आज़ाद को बर्तन मजने के लिए 2 आने दिए जाते थे |
  • चंद्रशेखर आज़ाद को फिल्मे देखने का बड़ा ही शौख था |
  • चंद्रशेखर आज़ाद और लाल बहादुर शास्त्री दोनों बनारस के काशी पीठ कॉलेज से पढ़े है |
  • चंद्रशेखर आज़ाद और रामप्रसाद बिस्मिल ने 9 अगस्त 1925 को काकोरी कांड को अनजाम दिया |
  • चन्द्रशेखर आज़ाद ने झांसी के पास एक मंदिर में 8 फीट गहरी और 4 फीट चौड़ी गुफा बनाई थी , जहा वह अपना वेश बदल कर रहा करते थे |
  • चन्द्रशेखर आज़ाद और अंग्रेजो के बीच जो अंतिम लड़ाई हुई थी वह इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में हुई थी |
  • चन्द्रशेखर आज़ाद  जी की मृत्यु 27 फेब्रुअरी 1931 को  इलाहाबाद में हुई |
  • चन्द्रशेखर आज़ाद ने जिस पार्क में खुदको गोली मारी थी उस पार्क का नाम अब चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क है |
  • चन्द्रशेखर आज़ाद मध्य प्रदेश के जिस गांव में रहते थे उस गांव का नाम धिमारपुरा से बदलकर आजादपुरा रखा गया|

जल्दी से जानिए चंद्रशेखर आज़ाद के बारे – Biography of Chandrashekhar Azad in hindi

  • Full Name- Chandrashekhar Sitaram Tiwari
  • Nickname- Chandrashekhar Azad, Azad
  • Profession- Indian FreedomFighter
  • Date Of Birthday- 23 July,1906
  • Date of Death- 27 February, 1931
  • Birthplace-  Unnao , Uttar Pradesh
  • Age of Death- 25 (Approx)
  • Zodiac- Leo
  • Nationality- Indian
  • Hometown- Unnao , Uttar Pradesh
  • School- Not Known
  • Qualification- Not Known
  • College- Kashi Vidyapeeth
  • Religion- Brahman
  • Hobbies-Watch Movie, Read Book , Write Quotes

आशा करते है की आपको हमारा ये पोस्ट पसंद आया हो और अगर पसंद आया है तो कृपया एक कमेंट जरूर करे | थैंक्स Biography of Chandrashekhar Azad in hindi Read करने के लिए |

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Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

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