आखिर इन्हे “Symbol of Kindness” क्यों कहते है | Biography of Mother Teresa In HIndi 2020

आखिर इन्हे “Symbol of Kindness” क्यों कहते है | Biography of Mother Teresa In HIndi 2020

Biography of Mother Teresa In HIndi-

“खूबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते , लेकिन अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत होते है” ऐसे ही महान विचारो से समाज को अपना पूरा जीवन अर्पित करने वाली वो महान महिला है “अगनेस गोंझा बोयाजिजू” जिन्हे पूरा विश्व मदर टेरेसा के नाम से जानता है | समाज के प्रति अपना पूरा जीवन निछावर करके उन्होंने गरीबो , असहायों , रोगियों, अनाथ बच्चो और  ना जाने कितनो की मदद की | शायद इसीलिए कई लोग उन्हें भगवान् का एक अवतार भी कहा करते है | हमेशा दुसरो के बारे सोचने वाली मदर टेरेसा ना जाने कब पुरे विश्व भर में अपने काम के लिए प्रसिद्ध हो गई | कैसे उनका स्थान भारत बन गया ? और कैसे वह एक बहुत ही कृपालु दयानिधि महिला बनकर एकेले ही पुरे विश्व भर में अपने अच्छे विचारो को लोगो तक पहुंचने लगी ? कई बार उनके सामने संकटो का पहाड़ आ जाता था लेकिन उन्होंने कभी भी पीछे हटने का फैसला नहीं किया |  ऐसी महान आत्माओ का जन्म हजार सालो में एक बार ही हो पता है | उनके जीवन की कहानी से हमे बहुत प्रेणना मिलेगी | तो चलिए  अब बहुत देरी न करते हुये शुरू करते है Biography Of Mother Teresa In Hindi को |

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शुरआती जीवन और परिवार (Starting Life and Family)

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे शहर के मसेदुनिया में हुआ था | जहा मदर टेरेसा अपने माता-पिता और दो भाई-बहनो के बीच ही पली बड़ी हुई | मदर टेरेसा की माताजी का नाम द्राना बोयाजू था , जोकि एक समाज सेविका थी और साथ ही घर का खर्च चलाने के लिए सिलाई का काम भी किया करती थी | उनके पिताजी का नाम निकोला बोयाजू था , जोकि एक व्यापारी का काम किया करते थे , उनका दवाइयों का बिज़नेस हुआ करता था | हलाकि जब टेरेसा मात्र 8 साल की ही थी तो उनके पिताजी का देहांत हो गया था जिसके इनकी माँ ने बहुत मेहनत करके अपने सभी बच्चो का पेट पाला | और आगे बात उनके भाई-बहनो की करे तो उनके नाम कुछ इस प्रकार है अगा बोयाजू और लैज़र बोयाजू | जिसमें से अगा बोयाजू उनकी बहन थी तो  लैज़र बोयाजू उनके भाई थे | दोनों ही उनसे बड़े थे | 

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मानवता के प्रति उनका झुकाव कब से शुरू हुआ ?

ये बात उनके बचपन की ही है जब मदर टेरेसा “अगनेस गोंझा बोयाजिजू” हुआ करती थी | उनके नाम में जो गोंझा शब्द है जिसका अर्थ उनके जन्म स्थान पर खूबसूरत फूल होता है | वो इसीलिए था क्युकी मदर टेरेसा एक बेहद ही खूबसूरत महिला थी , जिनकी सुंदरता के चर्चे उन दिनों वहा की गलियों में आम हुआ करता था | लेकिन साथ ही उनके परिवार ने उनको शुरआत से ही दुसरो की सेवा करना , उनकी मदद करना और उनका साथ देना सिखाया था | मदर टेरेसा को भी बचपन से ही मानवता के प्रति लगाव होना शुरू हो गया था और इसके पीछे की वजह कोई और नहीं बल्कि उनकी माताजी थी | जोकि हमेशा अपने तीनो बच्चो को दूसरे से प्रति आदर एवं दयालु होना सीखती थी | लेकिन तीनो बच्चो में से मदर टेरेसा ने अपनी माताजी की इस सिख को काफी गोरपूर्ण तरीके से लिया और आगे चलकर अपना पूरा जीवन ही दुसरो की भलाई में समर्पित कर दिया |

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मदर टेरेसा की पढाई-लिखाई कहा तक हुई है ? (Education)

मदर टेरेसा जिन्हे की “Symbol of Kindness” भी कहा जाता है | इन्होने बहुत ही कम उम्र ही नॉन बनने का फैसला कर लिया था | नॉन क्या होता है ? नॉन क्रिस्चियन शब्द में उपयोग होने वाला वो शब्द  है , जो लोग दुनिया या मानवता के प्रति अपना पूरा जीवन दे देते है उन्हें ही नॉन कहते है | इसे आप ऐसे भी समझ सकते है की हमारे भारत में इन्हे संत कहते है | खैर जहा तक बात इनके पढाई करे तो हमे जानने को मिलेगा की मदर टेरेसा ने केवल स्कूलिंग शिक्षा तक  की ही पढाई पूरी की है , जहा इन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा Albanian Language at a Private Catholic school  से पूरी की है | और फिर महज 18 साल की उम्र में ही इन्होने नॉन बनने का फैसला कर लिया और Sister of Loreto को ज्वाइन कर लिया | जहा फिर इन्होने अपनी नॉन बनने की शिक्षा ग्रहण की | साथ ही जब इन्होने नॉन बनने  फैसला कर लिया  था | तो ये आखिर बार अपने फॅमिली से मिलने गई | जहा इन्होने अपनी माँ  को इसके बारे में बताया पर इनकी माँ ने इन्हे नहीं रोका क्युकी वह जानती थी  की टेरेसा कुछ अच्छा काम कर रही है | जिस वजह अपनी फॅमिली से मिलने बाद उन्हें दुबारा कभी भी ये मौका नहीं मिला की वह अपनी फॅमिली से मिल सके |

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मदर टेरेसा का समाज के प्रति योगदान (Mother Teresa’s contribution to society)

ना केवल उनका योगदान समाज के प्रति था बल्कि अगर हम उनकी जीवनी का कोई हिस्सा पढ़े तो हमे पता चलेगा की जो एक चीज उन्हें इंसानियत का मासिआह बनाती थी | वो थी उनकी मुस्कराहट और गरीब से गरीब लोगो के प्रति उनका लगाव | आप शायद आज गरीबो की मदद या तो पैसो से करेंगे या फिर उन्हें भोजन देकर लेकिन मदर टेरेसा ने गरीब के प्रति अपना पूरा समर्पण दे दिया था जहा उन्होंने गरीबो के शोचालय तक साफ़ किये ,उनके घाव तक खुद ठीक किये | शायद इसी का ये  नतीजा है की आज दुनिया उन्हें करुणा की देवी मानती है | समाज को दिए अपने योगदान से उन्होंने काफी कुछ औरो को सिखाया | लेकिन भारत के प्रति  उनका एक अलग ही झुकाव रहा | जहा वह वर्ष 1929 में आयरलैंड से श्री लंका के रस्ते भारत आई | और यहाँ उन्होंने कलकत्ता में ही रूकने का  फैसला किया | तब इनको लोग सिस्टर टेरेसा कहकर बुलाते थे | जैसे जैसे सिस्टर टेरेसा ने अपने काम को बढ़या ,लोगो की मदद की वैसे वैसे ही लोग इन्हे मदर टेरेसा के नाम से जानने लगे | भारत को दिए अपने महत्वपूर्ण योगदान के चलते ही भारत सरकार ने वर्ष 1947 में भारत की नागरिकता देने का फैसला किया और  मदर टेरेसा भारत की हो गई | और हां, मदर टेरेसा को न केवल भारत का ही नागरिकता प्राप्त है बल्कि उन्हें तो 4 से भी ज्यादा देशो की नागरिकता प्राप्त है | उनका समाज और मानवता के प्रति योगदान को देखकर उन्हें कई पुरुष्कार भी मिले है | जिसमें की भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1962 में पद्मा श्री से  नवाजा और फिर भारत वर्ष 1980 में भारत के सबसे बड़े पुरुष्कार भारत रत्न से भी नवाजा गया | इतना ही नहीं उन्होंने पूरी दुनिया को अपने विचारो से गौरवर्णावित किया किया जिसके चलते ही इन्हे दुनिया का सबसे बड़ा पुरुष्कार नोबल प्राइज भी दिया गया | लेकिन इतना सब पाने के वावजूद भी उन्होंने कभी खुदके लिए कुछ नहीं माँगा , यहाँ तक अगर आपको उनके खाने के बारे बताये तो आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे जब आपको ये पता चले की वह सिर्फ दाल, खिचड़ी और  कभी कभी मछली ही खाया करती थी | और साथ ही  उनको जो भी पैसे नोबल पुरुष्कार से मिले थे वो सब उन्होंने मनाव कल्याण में ही दोनोटे कर दिया |

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मदर टेरेसा की मृत्यु कैसे हुई (Death Cause)

दरअशल उनकी मृत्यु की जो अहम् वजह रही वो थी काफी लम्बे समय से चल रहे ह्रदय और किडनी में  उनकी परेशानी  | जिसके कारण ही उन्हें साल 1983 में पहला दिल का दौरा पड़ा और फिर इसके बाद 1989 में फिर से दिल का दौरा पड़ा लेकिन मदर टेरेसा एक बहुत ही साहसी महिला थी साथ ही उनके पीछे करोड़ो लोगो की दुआ भी शामिल थी जिस वजह की मदर टेरेसा भगवान् भी ऊपर ले जाने से मना कर देते है | हालात ख़राब होने के वावजूद भी उन्होंने कभी सामाजिक कार्य को नहीं रोका | लेकिन वर्ष 1997 में  उन्हें ये अहसास हो चूका था की वह अब ज्यादा दिनों तक ज़िंदा नहीं रह पाएंगी | इसीलिए उन्होंने मिशनरी ऑफ़ चैरिटी के हेड का पद छोड़ दिया, जिसके बाद सिस्टर मैरी निर्मला जोशी को इस पद के लिए चुना गया | और फिर वो दिन आया जिसने मानवता की देवी को सदा-सदा के लिए हमेशे दूर कर दिया और  वो दिन था 05 सितम्बर 1997 का | जब कोलकाता के बिरला हॉस्पिटल में उनकी मृत्यु हो गई |

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निष्कर्ष (Conclusion Biography of Mother Teresa In Hindi)

आज भले ही कई लोग उनके बारे में बुरा-बुरा कहते है की मदर टेरेसा अपने धर्म का प्रचार कर रही थी | तो उनसे हम बस इतना कहना चाहेंगे की अगर समाज का भलाई करना अपने धर्म का प्रचार करना है तो हम सभी धर्मो के लोगो को ऐसा ही करना चलिए | जिससे की इस दुनिया में दया और करुणा की भावना बची रहे | साथ ही उनकी इस जीवनी को पढ़कर जो एक चीज हमे उनसे सीखनी चाहिए वो है हमे अपने जीवन में दुसरो की भलाई का मौका जब भी मिले तो उसे जरूर करे |

Biography of Mother Teresa In HIndi

तो चलिए जल्दी से जान लेते है Mother Teresa के बारे में (Short Biography of Mother Teresa In HIndi)

  • Full Name\Real Name- Anjezë Gonxhe Bojaxhiu
  • Nickname- Mother Teresa , Sister Teresa
  • Profession- Social Worker
  • Age of Death – 87 (At Present)
  • Birthplace- Skopje, North Macedonia
  • Hometown- Culcutta,India
  • Nationality- Many Country
  • Zodiac – Virgo
  • Weight- 56Kg
  • Height- 5feet
  • Date of Birth- 26 August, 1910
  • Religion- Catholic
  • Foodie Type- Non-Vegetarian
  • Marital Status – Unmarried
  • Hobbies- Philanthropic activities
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Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

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