Biography of Sadhguru(Jaggi Vasudev) In Hindi 2020

Biography of Sadhguru(Jaggi Vasudev) In Hindi 2020

Biography of Sadhguru in Hindi-

 

जग्गी वासुदेव जिसे की पूरी दुनिया Sadhguru के नाम से जानती है | एक ऐसा व्यक्ति जोकि लोगो के जीवन में प्रकाश भरने का और लोगो को मार्ग दिखाने का काम करता है | आप चाहे जिस भी परिस्थिति में क्यों ना हो ? वो आपको एक उचित मार्ग जरूर दिखाते है | एक योगी एक Speaker एक  Author और भी बहुत कुछ है हमारे Sadhguruji | उन्हें हर वर्ग के लोग सुनना देखना पसंद करते है  |

आज जहा कई लोग योग का असली महत्व समझ रहे है वही Sadhguru ने योग को ना केवल भारत तक सिमित रखा है बल्कि भारत के बहार भी उनकी संस्थान चलती है | एक आम इंसान कैसे करोड़ो लोगो को Inspire करता है ? कैसे जग्गी वासुदेव नाम का एक आम व्यक्ति Sadhguru बन जाता है ? आज हम इसके बारे में जानने जा  रहे है | तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है Biography Of Sadhguru In Hindi को |

शुरआती जीवन (Starting Life)

Sadhguru जिनके बचपन का नाम जग्गी वासुदेव था इनका जन्म 3 सितम्बर 1957 को कर्णाटक के Mysore में हुआ | एक साधारण तमिल परिवार में जन्मे जग्गी वासुदेव अपने माता-पिता के घर जन्मे सबसे छोटे बच्चे थे वही उनसे बड़ी दो उनकी बहन और एक बड़ा भाई था | जग्गी वासुदेव के पिताजी का नाम डॉक्टर वासुदेव था जोकि इंडिया रेलवेज में डॉक्टर का काम किया करते थे |

अपने पिताजी की सरकारी नौकरी की वजह से जग्गी वासुदेव को अलग अलग शहर में जाना पड़ता था | वही जग्गी वासुदेव की माताजी का काम सुशीला वासुदेव था जोकि एक ग्रहणी थी साथ ही पूजा पाठ में हमेशा ध्यान लगाने वाली महिला थी |

जग्गी वासुदेव हमेशा दूसरे बच्चो से अलग ही रहते थे जहा उनकी उम्र के बच्चे खेल-खुद किया करते थे तो वही जग्गी वासुदेव किसी एक चीज को घंटो-घंटो तक देखा करते थे |

कभी किसी पेड़ को देख लिया तो बस ! अब उसी पेड़ को घंटो देखते रह जाते थे ऐसे ही कभी किसी तालाव को देख लिया तो बस ! अब उस तलाव को घंटो तक देखते ही रह जाते थे |

जहा उनकी उम्र के बच्चे फुटबॉल हॉकी जैसे खेल खेला करते थे तो वही जग्गी वासुदेव उस उम्र में सांपो के साथ खेला करते थे |  वह बाहर तो अकेले ही जाते थे लेकिन जब वह घर आते तो उनके साथ कई सारे सांपो का गुच्छा भी होता था |

वासुदेव के इस अलग व्यवहार की वजह से उनके पिताजी डॉक्टर वासुदेव कभी कभी ये सोचा करते थे की कही उनके बेटे को तो कोई मानसिक रोग नहीं हो गया है | बड़े ही अनोखे जीवन जीने की वजह से सभी को ये तो जरूर पता चल गया था के उनके बेटे जग्गी वासुदेव के अंदर कुछ अनोखा जरूर है |

पढाई में कैसे थे Sadhguru ? (Education)

Sadhguru जिनके बचपन का  नाम जग्गी वासुदेव था | जग्गी वासुदेव में जो एक बात सबसे अनोखा था वो था उनका Concentration , किसी भी चीज के ऊपर घंटो तक ध्यान लगाए वह रह सकते थे |

जग्गी वासुदेव की शुरआती पढाई Demonstration School , Mysore से शुरू हुई | जहा जग्गी वासुदेव अपने क्लास में एक अच्छे विद्यार्थी के रूप में गिने जाते थे |

जग्गी वासुदेव शुरआत में तो एक फौजी बनना चाहते थे लेकिन फिर उनका ये इरादा बिल्कुल ही बदल गया | इसकी वजह ये थी की उनका ध्यान अब योग में लगने लगा था |

जब जग्गी वासुदेव मात्र 10 साल के थे तो उनकी मुलाकात एक योग गुरु मल्लदिहली श्री राघवेंद्र से हुई जिन्होंने की उन्हें योग की शिक्षा दी |

जब वह योग की शिक्षा ले रहे थे तो उन्हें उनकी उम्र के कई बालक बड़े सताया करते थे लेकिन जग्गी वासुदेव ने कभी भी उनको कुछ नहीं कहा |

अपने योग के साथ साथ पढाई को भी पूरा कर रहे जग्गी अब अपनी शुरआती पढाई को पूरा कर लेते है वो भी महज 15 साल जैसी छोटी उम्र में |

अपनी शुरआती पढाई को पूरा कर अब वह अपनी आगे की पढाई के लिए University of Mysore में अपना एडमिशन ले लेते है जहा वह अपना एडमिशन Bachelor of Arts के English Literature में करा लेते है |

यहाँ से अपने graduation को पूरा कर उन्हें अब Travelling करने में आनंद आने लगता है | जिसके बाद वह अपने बाइक को लेकर एक शहर से दूसरे शहर तक जाया करते थे |

एक बार तो वह नेपाल तक चले गए लेकिन उन्हें बॉर्डर पर ही रोक दिया गया था क्युकी  उनके पास नेपाल में Enter करने का कागज नहीं था |

क्यों बिज़नेस किया Sadhguru ने ? (Business)

जब Sadhguru उर्फ़ जग्गी वासुदेव अपने कॉलेज को पास कर लेते है तो उन्हें Travelling का शौख लग जाता है | जहा वह रोजाना किसी ना किसी नयी जगह घूमने जाते ही रहते है , घूमने के दौरान ही उन्हें ये पता चलता है की अगर उन्हें दुनिया घूमना है तो उन्हें बहुत सारे पैसो  की जरूरत पड़ेगी इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने अपना एक बिज़नेस शुरू किया | अपने बिज़नेस को शुरू कर उन्होंने बहुत सारे पैसे भी कमाए ,और वह अपना  एक अच्छा जीवन व्यतीत करने लगे थे  |

कैसे चामुंडी हिल ने उनकी ज़िन्दगी बदली ? (Chamundi Hill)

दरअशल चामुंडी हिल ही वो जगह है जहा जग्गी वासुदेव को अपना आत्मज्ञान  मिलता है | जब वह अपना बिज़नेस अच्छे से चला रहे होते है तो उनके परिवार वाले उनके करीबी लोग सभी उनसे बहुत खुश होते है पर वही जग्गी वासुदेव अब भी अपने अंदर वो ख़ुशी महसूस नहीं करते जोकि उन्हें करनी चाहिए |

अपने अंदर की वो ख़ुशी ढूढ़ने के लिए वह एक दिन अपनी बाइक उठाते है और बिज़नेस मीटिंग करने आये Mysore के चामुंडी हिल आ जाते है |

जहा वह अपनी बाइक को रोक कर उस हिल पर छड़ जाते है और ध्यान लगते है | इसी ध्यान के दौरान उन्हें ये अहसास होता है की जैसे मानो उनकी आत्मा हर वो चीज है जोकि वह देख सकते है महसूस कर सकते है |

मात्र 10 मिनट के इस ध्यान को समझकर कर रहे जग्गी वासुदेव को ये नहीं पता चला की वह पिछले 4 घंटे से ध्यान में है |  यही से उन्हें आत्मज्ञान मिला |

Sadhguru की प्रेमी कहानी और एक सच ? (Love Story) (Biography of Sadhguru in Hindi)

इसे एक प्रेमी कहानी कहना ही उचित नहीं होगा क्युकी ये एक सच्ची और एक दर्द भरी प्रेम कहानी है | शायद ये आपको किसी फिल्म की स्टोरी लगे पर ये सच है |

Sadhguru और विजयकुमारी जोकि उनकी पत्नी थी इन दोनों की मुलकात एक Mysore के एक Meetup में हुई जहा Sadhguru उर्फ़ जग्गी वासुदेव को भी बुलाया गया था | दोनों ने जब एक दूसरे को पहली बार देखा तभी से इन दोनों के बीच प्यार हो गया |

दोनों  इसके बाद  भी मिले और दोनों का प्यार बढ़ता चला गया | जहा Sadhguru उन दिनों एक बिज़नेस मैन थे तो वही विजयकुमारी एक बैंकर थी जोकि बैंक में काम करती थे |

Sadhguru विजयकुमारी को प्यार से विज्जी बुलया करते थे | एक दिन जब जग्गी वासुदेव अपने पापा से कहा की उन्हें शादी करनी है वो भी विज्जी से तो उनके पापा ने पुछा की उस लड़की का Caste क्या है ? उसके पिताजी का क्या नाम है ?

तो इसका जबाब देते हुए Sadhguru ने ये कहा की ” मुझे बस उस लड़की का नाम पता है विज्जी , और बस मुझे उस से शादी करनी है ” < यहाँ क्लिक करके पूरा किस्सा जाने >

अपने प्यार को ना किसी जाती के आधार पर तौला और एक शिव मंदिर में जाकर बहुत की कम लोगो को शादी में शामिल कर Sadhguru ने विज्जी उर्फ़ विजयकुमारी से शादी कर ली |

उन्होंने साल 1984 में विज्जी से शादी कर ली और फिर दोनों नयी नयी जगह पर घूमे जाया करते थे  साथ ही वह दोनों स्वामी निर्मला नन्द के आश्रम जाकर वहा आत्मज्ञान भी लेते थे |

इसी तरह कुछ दिनों तक चलता रहा फिर उन्होंने अपने  घर  एक कन्या को 1990 में जन्म दिया जिसका की नाम राधे जग्गी रखा | Sadhguru खुद तो आत्मज्ञान की शिक्षा ले रहे थे साथ ही उनकी पत्नी विजयकुमारी भी आत्मज्ञान की शिक्षा ले रही थी की तभी कुछ सालो बाद उनकी पत्नी अपना त्याग करने के लिए उनसे कहती है |

पर शुरुआत में Sadhguru इसे बस एक मजाक लेते है , लेकिन जब उनकी पत्नी अपने त्याग की बात अपनी सात साल की बेटी से करने लगते है तो Sadhguru उन्हें समझाते है की ऐसा करना सही नहीं है |

लेकिन एक दिन जब Sadhguru , उनकी पत्नी और उनकी बेटी पूजा पर बैठे होते है की तभी उनकी पत्नी बीच पूजा से उठ दूसरे कमरे में चली जाती है और महासमाधि ले लेती है |Sadhguru को ये देख उनकी अनोखो पर विश्वास नहीं हो रहा होते है |

Shraddha Kapoor Love Story (Click here)

ईशा फाउंडेशन क्या है ? (What is Isha foundation?)

ईशा फाउंडेशन जिसकी शुरआत साल 1992 में तमिल नाडु के कोयंबटूर में हुई थी | इस संस्थान के संस्थापक Sadhguru श्री जग्गी वासुदेव है | इस संस्थान का मुख उदेश लोगो को उनके आत्मज्ञान का मार्ग दिखना है साथ ही योग के अलसी महत्त्व को भी समझना है |

आज दुनिया में जिस एक चीज को लोग सबसे ज्यादा खोज रहे है वो है आत्म शांति जिसके की ये फाउंडेशन लोगो को देने में सक्षम है | ये फाउंडेशन ना केवल भारत में है बल्कि पूरी दुनिया में इस फाउंडेशन अपने अपना संस्थान बना रखा है |

देश हो चाहे विदेश से हो हर जगह से लोग उनके फाउंडेशन में हिस्सा लेते है | (और गहराई से जाने यहाँ क्लिक करके)|इस फाउंडेशन में भाग लेने के बाद आपको शांति एवं अपने और अपने आत्मा के साथ जुड़ना सिखाया जाएगा साथ ही योग के महत्व को भी समझाया जायेगा |आप ईशा फाउंडेशन यहाँ क्लिक करके जुड़ सकते है |

ईशा फाउंडेशन के पीछे की कहानी ? (Isha Foundation Story) (Biography of Sadhguru In Hindi)

दरअशल जब Sadhguru अपने ध्यानलिंग यानि की ध्यान के केंद्र को खोज रहे थे तो वह एक दिन अपने दोस्त के मिलकर वह पुरे तमिल नाडु में एक स्थान को खोजने लगे इसी बीच उनको वो स्थान दिखा जहा आज ईशा फाउंडेशन है | इस स्थान को देखने के बाद उन्होंने वहा आज शिवजी की 112 फ़ीट की मूर्ति स्थापित की है |

साथ ही एक बार जब उनसे पुछा गया की आप तो किसी धर्म पर विश्वास नहीं करते ? तो फिर महाशिव रात्रि को क्यों मानते है ? तो इसका जबाब देते हुए उन्होंने कहा की भगवान शिव एक शक्ति रूप है जिन्हे हर को पूजता है मैं महाशिवरात्रि इसीलिए मनाता हूँ की इस दिन अमावस्या के साथ साथ पूर्णिमा होता जिसमें की जल का स्तर काफी ऊँचा हो जाता है साथ ही इस दिनों लोगो को ज्यादा लेटना भी नहीं चाहिए इस से दुष प्रभाव पड़ता है इसीलिए इस दिन हमारे यहाँ पूरी रात महाशिवरात्रि मनाई जाती है |Sadhguru जग्गी वासुदेव के किये हुए अच्छे कार्यो की वजह से ही उन्हें साल 2017 में भारत सरकार की तरफ से पद्म विभूषण से नवाजा गया है |

तो चलिए जल्दी से जान लेते है Sadhguru के बारे में (Short Biography)

  • Full Name\Real Name- Jaggi Vasudev
  • Nickname- Sadhguru
  • Profession- Yogi,Author, Mystic,Philosopher,Youtuber,Philanthropist
  • Father- Dr. Vasudev
  • Mother- Susheela Vasudev
  • Brother- One Elder Brother
  • Sister- Two Elder Sister
  • Age – 62( at 2020)
  • Birthplace-Mysore,Karnataka,
  • Hometown- Karnataka
  • Nationality- Indian
  • Zodiac – Virgo
  • Weight- 70Kg
  • Height- 5feet 8 inch
  • Date of Birth- 03 September, 1957
  • School- Demonstration School,Mysore
  • Qualification- Bachelor of Arts(Mysore University)
  • College- Mysore University
  • Religion- Hinduism
  • Caste- Sampraday
  • Foodie Type- Vegetarian
  • Wife\Spouse- Vijaykumari
  • Daughter-Radhe Vasudev
  • Marital Status – Married
  • Hobbies- Travelling ,Playing Games,Cricket, Reading
  • Net Worth- 11,00Crore

अगर आपको हमारा ये पोस्ट अच्छा लगा हो कृपया हमे एक कमेंट जरूर करे साथ ही अगर कुछ कमी रह गई तो जरूर बताया आपका एक कमेंट हमरे पोस्ट को और अच्छा कर सकता है | आपका बहुत बहुत धन्यवाद Biography of Sadhguru in Hindi को पढ़ने के लिए |


और भी कई पोस्ट पढ़े–  Biography of Sadhguru in Hindi

Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

Leave a Reply