The Great Mathematician Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi 2020
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The Great Mathematician Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi 2020

Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi-

हेलो ! कैसे हो फ्यूचर के सुपरस्टारों आशा  करता हु की अच्छे होंगे और लॉकडाउन का पालन कर रहे होंगे |

निवेदन:- घर पर रहे सुरक्षित रहे। …..

Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi
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 “एक समीकरण का मतलब मेरे लिए कुछ भी नहीं  है जब तक कि यह भगवान के बारे में एक विचार व्यक्त नहीं करता है।” –

ये कहना था सदी के सबसे बड़े माथेमैटिशन श्रीनिवास रामानुजन का | सदी का सबसे बड़ा माथेमैटिशन क्यों ? क्युकी आज की हमारी लाइफ जो इतनी सरल हो पायी है उसमे एक बड़ा योगदान भारत के महान माथेमैटिशनो में से एक श्रीनिवास रामानुजन का भी है | अच्छा वो कैसे ?

तो वो ऐसे की आज के कई सिद्धांत रामानुजन के ही दिए हुए है जिनसे की मानव जीवन इतना सरल हो पाया है  और ये बात कई और भी माथेमैटिश मान चुके है | यहाँ तक की रामानुजन के खोजे गए  3, 900 सिद्धांतो में अभी तक करीबन 300 से 400 ही सिद्धांतो को बड़े- बड़े माथमेटिशन हल कर पाए है |

कई बड़े-बड़े माथेमैटिशन ये भी कहते है की अगर हमने श्रीनिवास रामानुजन के सभी सिद्धांतो को समझ लिया तो हम  हर वह चीज कर सकते है जिससे की फिर कभी भी मानव के ऊपर कोई आपत्ति आ ही नहीं सकती , मानव फिर हर वह चीज कर सकेगा जो वो सोच सकता है |  इतने बड़े माथेमैटिशन थे श्रीनिवास  रामानुजन ,

पर बड़ा ही दुःख होता है जब ये पता चलता है की भारत में जन्मे रामानुजन की मूवी भारत के लोग नहीं बल्कि विदेशी लोग बना रहे है जिनसे की वहा के बच्चे रामानुजन से प्रेणना ले  और वह भी अपने देश के लिए कुछ बड़ा कर सके | खैर ! ऐसी बड़ी सोच वाले इंसान के ऊपर कोई बड़ा ही जीनियस व्यक्ति मूवी बनाने की सोचेगा |

सर रामानुजन के टैलेंट को आप इसी बात से समझ   सकते है की वह मैथ के 1 सवाल को 100 अगल-अगल तरीके से हल कर सकते है , यहाँ तक उन्होंने महज 13 साल की उम्र में ही एडवांस्ड ट्रिगोनोमेट्री(Advanced Trigonometry) जैसे बड़े ही कठिन पाठ को हल कर दिया था | वह अपनी क्लास से बड़े बड़े क्लासो के कठिन सवालो को चुटकिओ में हल कर दिया करते थे |

तभी तो उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने ये कहा की ”  ये जो परीक्षा सभी बच्चो के लिए है , उसमें रामानुजन इनसे कही ऊपर है क्युकी वह अपनी क्लास के सवालों को पल भर में ही हल कर दिया करते थे ” ,  अरे ! भाई अब सर की बायोग्राफी तो बताओ ? तो बस अब शुरू ही होने वाली है |

कैसे बने इतने बड़े माथमेटिशन? कौन-सी बीमारी की वजह से उनका निधन इतनी जल्दी हो गया ? कैसे मैथ के अलावा सभी और विषयो में असफल हो गये थे ? ऐसे ही और भी सवालो और सर के जीवन के बारे में आज आपको पढ़ने को मिलेगा तो कृपया इस पोस्ट को पूरा पढ़े |

शुरआती जीवन – (Early Life)

सर श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर,1887 को तमिल नाडु के एक गांव इरोड , मद्रास में हुआ था | वह बेहद ही गरीब लयेंगार ब्राह्मण परिवार में जन्मे अपने माता-पिता के पहले संतान थे | उनके पिताजी का नाम के. श्रीनिवास लयेंगार था , जोकि अपने ही गांव के एक साड़ी वाले दूकान में काम करते थे |

वही उनकी माताजी का नाम कोमलताम्मल लयेंगार था , जोकि एक ग्रहणी थी और साथ ही वह मंदिरो में भजन गाया करती थी | रामानुजन के बाद भी उनके माता-पिता की दो और संताने हुई , लेकिन वह किसी कारण वश इस दुनिया में नहीं आ पाए जिस वजह से बचपन में ही उनकी मृत्यु हो गयी |

अब रामानुजन अपने माता-पिता के एकलौते संतान बचे हुए थे जिस वजह से उनकी माता और उनके पिता उन्हें बहुत प्यार करते थे | रामानुजन का अधितर बचपन कुम्बकोनम के गांव में बिता , यही वह गांव था जहा से रामानुजन का भगवान के ऊपर विश्वास बहुत अधिक हो गया था क्युकी यह गांव अपने मंदिरो की वजह से पुरे भारतवर्ष में काफी प्रसिद्ध था और आज भी बहुत प्रसिद्ध है जिस वजह से रामानुजन हमेशा भगवान् से जुड़े हुए रहते थे |

पढाई-लिखाई में कैसे थे रामानुजन ? (Education) (Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi)

इतने बड़े माथेमैटिशन होने के नाते कई लोग ये सोचते है की यह बहुत ही ज्यादा अच्छे रहे होंगे अपनी पढाई में पर ऐसा बिलकुल भी नहीं बल्कि इसके उलट तो  इनके टीचर इनसे दूर भगा करते थे | वह क्यों ? तो वह इसीलिए क्युकी रामानुजन एक ऐसे बच्चे थे जिन्हे हमेशा दूसरे बच्चो से अलग सवाल आपने दिमाग में आते थे ,

जैसे की दुनिया किसने बनाई? या दुनिया का पहला इंसान कौन था ? ऐसे और कई सवाल वह अपने टीचरो से पूछा  करते थे पर उनके टीचरो के पास भी उनके इन सब सवालों का जबाब नहीं होता था | रामानुजन को बचपन से ही मैथ्स(Maths) पढ़ने का बड़ा ही शौख था वह हर समय मैथ्स के सवालों को हल करते रहते थे | 

यहाँ तक की जब उनके दोस्त खेल रहे होते थे तो  वह सिर्फ अपने मैथ्स के किताबो के कठिन-कठिन प्रशनो को हल किया करते थे | जिस वजह वह अपनी उम्र के बच्चो से काफी ज्यादा आगे निकल गए थे |

कई इतिहासकार तो यहाँ तक कहते है की रामानुजन के पास जब किताबे खरीदने के पैसे नहीं होते थे तो वह उन बड़े बच्चो से किताबे इस शर्त पर माँगा करते की वह उनके सभी सवालों को हल कर देंगे | ये सुनकर आज के कई युवा तो इसपर विशवास ही नहीं करेंगे लेकिन ये सत्य है |

अपने से बड़े विद्याथिर्यो के मैथ के सवाल वह हल कर के दिया करते थे | यहाँ तक कई सवाल तो उनके टीचर भी हल नहीं कर पाते थे जो की रामानुजन बस कुछ पालो में ही हल कर दिया करते थे |

जिस वजह से रामानुजन अपने स्कूल में काफी मशहूर थे | यहाँ तक अपने 10वीं के परीक्षा में उन्होंने पुरे जिले में टॉप किया था |

एक सवाल जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया ? (One Story Of Ramanujan)

ये स्टोरी उनके स्कूल के दिनों की जब रामानुजन अपनी क्लास में पढाई कर रहे होते है तब उनके टीचर अपने सभी विद्याथियो को भाग(Divide) करना सीखा रहे होते है |

वह कहते है जब अब किसी भी नंबर को उसी नंबर से भाग देते है तो सिर्फ 1 देता है , जसे की 100 को 100 से भागा दो तो वह हमे 1 देता है या 1000 को 1000 से भागा दो तो वह हमे 1 देता है |

इसी के बाद रामानुजन अपने टीचर से ये पूछते है की , सर ” अगर 0 को 0  से भागा दे तो क्या वह फिर भी हमे 1 ही देगा ” इस प्रशन को सुन उनके टीचर को बड़ा ही आश्चर्य होता है और वह इसी का जबाब नहीं दे पाते है |

यहाँ एक बात जान आप हैरान होंगे की रामानुजन बाकि सभी विषयो में असफल हो जाते थे लेकिन जब बात मैथ्स यानि की गणित की हो तो वह हमेशा 100 से 100 अंक लाते थे |

आखिर क्यों 10वीं में टॉप और 12वीं में असफल हो गए ? (Why Ramanujan Failed In 12th Story?)

रामानुजन अपने स्कूल के एक ऐसे छात्र थे जिन्हे की उनके टीचर से लेकर उनके प्रिंसिपल भी सपोर्ट किया करते थे जिस वजह से ही जब उन्होंने 10वीं क्लास में टॉप किया था तो उन्हें छात्रवित्ति मिली थी जिससे की उनके परिवार वालो के ऊपर उनकी पढाई का बोज ना पड़े |

परन्तु ऐसे ज्यादा दिनों तक हो नहीं पाया और उनको अपनी पढाई छोड़नी पड़ी, क्या पढाई छोड़ दी ?  जी हां , रामानुजन की किताबी योग्यता बस 10वीं तक ही है | अच्छा तो पढाई किस वजह से छोड़ दी थी उन्होंने ? तो हुआ यूँ की जब रामानुजन 10वीं पास करके आये तो उनका मन मैथ्स के प्रति लगाव और बढ़ गया और बाकि सभी विषयो को उन्होंने पढ़ना ही बंद कर दिया था ,

सिर्फ और सिर्फ मैथ्स को पढ़ा करते थे | जिस कारण वह अपने 11वीं के एग्जाम में मैथ्स को छोड़ बाकि सभी विषयो में असफल हो गए थे | जिस कारण उनका छात्रविर्ती बंद हो गया |इस पर उनके टीचर ने उन्हें और भी सब्जेक्ट्स को पढ़ने कि सलाह दी  , तो फिर उन्होंने कैसे ना कैसे करके 11वीं क्लास को पास किया लेकिन जब वह 12वीं में आये तो फिर से वह मैथ्स को छोड़ बाकि सभी विषयो में असफल हो गए थे |

जिसके बाद फिर उन्होंने अपनी पढाई छोड़ दी | और फिर वह अपने घर पर ही गणित(Maths) के उपयोग करने लगे , जिसे देख उनके पिताजी बड़े निराश हुए jतो उन्होंने फिर रामानुजन का विवाह जानकी देवी से करवा दिया |

कैसे पहुंचे कैंब्रिज रामानुजन ? (Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi)

शादी होने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी अब रामानुजन पर आ गई थी जिससे लेकर फिर उन्होंने नौकरी करने का सोचा , तो बड़े ही कठिन प्रयासों और नेल्लूर के कलक्टर दीवान बहादुर आर. रामचंद्र राव ने उनकी बहुत मदद की।

उनकी मदद से रामानुजन को मद्रास पोर्ट ट्रस्ट के आफिस में 30 रूपये मासिक की नौकरी प्राप्त हो गयी और उनका जीवन आराम से कटने लगा।  यहाँ भी वह अपने गणित के पाठ से सभी को चौकाया करते थे वह बिना कैलकुलेट उपयोग किये ही कई बड़े-बड़े हिसाब बस पल भर में कर दिया करते थे |

जिससे की उनके ऑफिस का काम बड़ी जल्दी हो जाया करता था |और जो बच्चा हुआ समय रहता वह उसमे अपने गणित के फॉर्मूले तैयार किया करते थे | 23 साल की उम्र में रामानुजन का एक लेख प्रकाशित हुआ जिसे पढ़कर मद्रास इंजीरियरिंग कॉलेज के टीचर ग्रिफीथ महोदय ने उन्हें कैम्ब्रिज विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर जी.एच. हार्डी को पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया।

एच. हार्डी  उस समय के सबसे बड़े गणित प्रोफेसर माने जाते थे | रामानुजन का पत्र और उनके फार्मूला को देख एच. हार्डी रामानुजन से  बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुए और फिर उन्होंने रामानुजन को अपने साथ काम करने के लिए बुला लिया | जिसके बाद दोनों ने एकसाथ मिलकर कई फॉर्मूले इजात किये |

कैसे मात्र 33  साल की उम्र में रामानुजन की मृत्यु  हो गयी थी ? (Death) (Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi)

उनकी मृत्यु तो भारत में ही हुई थी लेकिन उनकी मृत्यु का कारण उनका कैंब्रिज में रहना बना | दरअशल हुआ कुछ ऐसा की जब वह कैंब्रिज गए तो वहा उनको अपने खाने-पीने में बड़ी दिक्कत हुई क्युकी रामानुजन शुद्ध शाकाहारी खाना खाने वाले व्यक्ति थे पर वही वहा के लोग ज्यादातर मांसाहारी खाना खाते थे |

जिस वजह से उनकी हालत ख़राब हो गयी | पर फिर भी वह कैसे भी करके वहा अपनी रिसर्च किया करते थे लेकिन एक दिन जब उन्होंने अपनी हालात ज्यादा ख़राब होते देखा तो वह एक हॉस्पिटल गए जहा फिर उन्हें पता चला की उनको टीवी(tuberculosis) जैसी एक खतरनाक बीमारी है जिसका की इलाज तब संभव ही नहीं था |

उसके बाद 1918 फिर वह भारत आ गए क्युकी इंग्लैंड का मौसम उनके लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं था | यहाँ आने के 2 साल बाद 26 अप्रैल 1920 को उनकी मृत्यु हो गई | जिस कारण भारत ने अपना  एक अनमोल हीरा खो दिया अगर रामानुजन कुछ और सालो तक जीवित रह जाते तो ना जाने वह कितने और गणित के सिद्धांत आज दुनिया को दिए होते |

पर अपनी इस छोटी सी ज़िदगी में भी उन्होंने अपना इतना नाम कमाया है जोकि कोई दूसरा अपनी पूरी ज़िदगी में भी नहीं कमा पता है | इसीलिए तो कहते है की ” ज़िदगी बड़ी होनी चाहिए , लम्बी नहीं ” |

जानिए सर रामानुजन के बारे में कुछ बहुत ही जबरदस्त फैक्ट्स – (facts)

  • सर रामानुजन के जन्मदिन को यानि की 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में साल 2012 से मनाया जाता है |
  • सर रामानुजन के ऊपर हॉलीवुड में एक मूवी भी बनी है जिसका की नाम ” the man who knew infinity” है |
  • सर रामानुजन जब 11 साल के थे तो वह बी.ए  के छात्रों को गणित पढ़या करते थे |
  • सर रामानुजन 12 साल होते -होते अपने थ्योरम लिखा करते थे |
  • सर रामानुजन ने महज 13 साल की उम्र में आते-आते एडवांस्ड ट्रिगोनोमेट्री हल कर दी थी |
  • सर रामानुजन कई सिद्धांत आज भी असुलझे है |
  • सर रामानुजन अपने परीक्षा में गणित का पेपर आधे समय में ही समाप्त कर दिया करते थे |
  • सर रामानुजन ने ही 0 भाग 0 को इंफिनिटी साबित किया था |
  • सर रामानुजन की शादी के दौरान वह 22 साल के थे पर वही उनकी पत्नी जानकी सिर्फ 10 की ही थी |
  • सर रामानुजन को भगवान् पे बहुत विश्वास था जिस वजह से वह हमेश ये कहते थे की उनके सारे थ्योरम और फॉर्मूले उन्हें एक भगवान् अपने सपने में बताते है |
  • 1729 इस नंबर को सर रामानुजन के नाम से भी जाना जाता है |
  • सर रामानुजन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएटड है उनको बेचलर ऑफ़ साइंस रिसर्च में डिग्री प्राप्त है |

आशा करते है की आपको हमारा ये पोस्ट पसंद आया हो और अगर पसंद आया है तो कृपया एक कमेंट जरूर करे | थैंक्स Srinivasa Ramanujan Biography in Hindi Read करने के लिए |

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Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

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