Steve Jobs Success Story in Hindi 2020

Steve Jobs Success Story in Hindi 2020

Steve Jobs Success Story 

क्या- क्या जानने को मिलेगा यहाँ – 

  • स्टीव जॉब्स कौन है –
  • स्टीव जॉब्स का जन्म कब  और कहा हुआ –
  • स्टीव जॉब्स के शूरति दिन –
  • स्टीव और उनके दोस्त के बारे में –
  • आखिर क्यों स्टीव 8-8 मील दूर जाकर मंदिर में खाना खाते थे –
  • स्टीव को मिले उनके पहले काम –
  • स्टीव और भारत का रिश्ता –
  • कंप्यूटर बनाने का आईडिया स्टीव को कहा से मिला –
  • एप्पल कंपनी की शुरआत कब हुई-
  • एप्पल कंपनी का नाम एप्पल क्यों पड़ा –
  • स्टीव को एप्पल कंपनी से क्यों निकला गया –
  • कैसे वापिसी की एप्पल में स्टीव जॉब्स ने –
  • एक वक़्त जब स्टीव नशे का सेवन करने लगे –
  • स्टीव जॉब्स की पर्सनल लाइफ के बारे में जाने –
  • स्टीव जॉब्स की मृत्यु कैसे हुई –

तो चलिए जानते है Steve Jobs के बारे में –

source- Facebook

स्टीव जॉब्स कौन है –

स्टीव जॉब्स को शायद ही किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत हो | वह एक बहुत ही बड़े और काफी प्रतिभावान वाले  व्यक्ति थे , जिन्होंने की एप्पल की कंपनी को इतना बड़ा बनाया ,की आज की दुनिया एप्पल के प्रोडक्ट्स के लिए दिन-रात उनकी कंपनी या स्टोर के बहार खड़ी रहती है | आप इसे ऐसे भी भी समझ सकते है की एप्पल का आधार ही स्टीव और उनके एक मित्र ने रखा |उनके मित्र के बारे में हम आगे जानेगे | स्टीव जॉब्स एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने की दुनिया को ये बताया की आपकी चाहत दुनिया की चाहत बन सकती है | आपको आगे आने वाले पैराग्राफ में स्टीव जॉब्स के बारे में एक अनोखी चीज पता चलेगी | तो पढ़ते रहिये |

स्टीव जॉब्स का जन्म कब  और कहा हुआ –

आपको ये बात शायद हैरान करे की स्टीव जॉब्स एक गोद लिए हुए बच्चे थे | यहाँ तक की स्टीव की माँ ने तो ये भी सोच रखा था , की वह अबॉरशन करा लेंगी |पर कहते है ना की सब कुछ भगवान् के हाथ में है | वही उन्होंने स्टीव को इस दुनिया में जन्म दिया और उन्हें दूसरे माता-पिता के हाथो सौप दिया | जिनका की नाम पॉल और  क्लारा जॉब्स था | उन्होंने स्टीव को गोद लिया और उन्हें पला |स्टीव का जन्म 24 फेब्रुअरी,1955 को कैलिफ़ोर्निया के सन फ्रांसिको में हुआ था | वह एक अविवाहित माता-पिता के बच्चे थे , इसी वजह से उनकी माँ जोअन्नी करोले स्चीएब्ले ने उन्हें दूसरे माता-पिता को सौप दिया |वही उनके पिता का नाम अब्दुल फ़त्ताह जंडली था | आगे आपको उनके उनके शूरति दिनों के बारे में जानने को मिलेंगे |

स्टीव जॉब्स के शुरुआती दिन –

स्टीव जॉब्स के माता-पिता , जिन्होंने की स्टीव को गोद लिया था | उनके पिता एक मेकेनिक थे, वही उनकी माता एक एक अकाउंटेंट थी |स्टीव जॉब्स को इलेक्ट्रॉनिक्स वाली चीजों से काफी लगाव था | वह इस वजह से था , क्युकी स्टीव के माता-पिता ने अपने घर के पास एक गेराज खोला था ,जहा की स्टीव को बहुत सारी एलेक्ट्रॉनिकाल चीजे मिल जाती , और स्टीव उन चीजों को लेकर कुछ ना कुछ हमेशा किया करते थे | वही से उन्हें इलेक्ट्रिक वाली चीजों से लगाव हो गया |स्टीव जॉब्स को शुरआती पढाई में तो कोई दिक्कत नहीं आयी , क्युकी उनके माता-पिता ने उनके हाईस्कूल तक का खर्चा संभल रखा था , पर जब स्टीव अपनी आगे की पढाई के लिए , कॉलेज आये ,तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा , क्युकी उनके माता पिता उनके कॉलेज का खर्चा नहीं उठा पा रहे थे , इसी वजह से  स्टीव ने  कॉलेज के पहले सेमेस्टर के बाद दूसरा सेमेस्टर को छोड़ने का फैसला किया | स्टीव अपना कॉलेज छोड़ने के बाद जल्द ही कैलीग्राफी की क्लास करने लगे | वहा  उन्होंने अपनी लिखाई को इम्प्रूव किया , जिसके बारे में स्टीव ने अपनी स्पीच में भी बताया की हमारी ज़िन्दगी के हर डॉट्स आगे हमारी ज़िन्दगी में जरूर मिलते है |

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स्टीव और उनके दोस्त के बारे में –

स्टीव जब कैलीग्राफी सिख रहे थे , तो उन्हें , उन्ही के जैसा एक दोस्त मिला , जिसे की स्टीव की तरह ही इलेक्ट्रॉनिक्स में काफी दिलचस्पी थी | उनके  इस दोस्त का नाम वोजनियाक था |

आखिर क्यों स्टीव 8-8 मील दूर जाकर मंदिर में खाना खाते थे –

ऐसा इसीलिए क्युकी , स्टीव जब बड़े हुए तो उन्हें अपने शुरआती दिनों  में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिस वजह से वह  कोक के बोतल बेज कर अपने दिन और रात का गुज़ारा  किया करते थे | एक बात ये भी है की, जॉब्स अपने कुछ पैसे बचाने के लिए 8 मिल दूर जाकर कृष्णा मंदिर में खाना कहते थे , वह बताते थे, की वह रात का खाना हमेशा कृष्णा मंदिर से ही खाते थे , और उन्हें वह का खाना काफी पसंद भी था | 

स्टीव को मिले उनके पहले काम –

स्टीव बचपन से ही काफी प्रतिभाशाली व्यक्ति थे , जिस वजह से उन्हें महज 17 साल की उम्र में ही , एक वीडियो गेम बनाने वाली डेवलिंग कंपनी में काम करने का मौका मिल गया , पर स्टीव कुछ बड़ा करना चाहते थे , जिस वजह से उन्होंने उस कंपनी को छोड़ दिया |

स्टीव और भारत का रिश्ता –

साल 1974 में स्टीव जॉब्स लीक से हटकर कुछ करना चाह रहे थे, तभी उनके किसी दोस्त ने सलाह दी कि वे भारत जाएं. इसी साल स्टीव जॉब्स अपने दोस्त के साथ उत्तराखंड पहुंचे. यहां वे कई मंदिरों और आश्रम में रहे. इसी दौरान वे नैनीताल स्थित नीम करौली बाबा के कैंची आश्रम पहुंचे. उस समय तक नीम करौली बाबा की मौत हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने यहां ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगी’ नामक किताब पढ़ी. स्टीव जॉब्स खुद कह चुके हैं कि इस किताब को पढ़ने के बाद उनके विचार बदल गए और जीवन को देखने का उनका नजरिया बदल गया.स्टीव ने जो भी पैसे अपनी इस जॉब से कमाए थे , उससे वह भारत गुमने आये , और यहाँ उन्होंने भारत के धर्मो का अध्यन किया | जोकि उनको काफी पसंद भी आया |

कंप्यूटर बनाने का आईडिया स्टीव को कहा से मिला –

स्टीव अब एक सुलझे हुए इंसान बन चुके थे | जिस के चलते उन्होंने भारत से लौटने के बाद एक कंपनी में जॉब करना शुरू किया , इसी बीच उनके करीबी दोस्त वोजनियाक ने उन्हें एक पर्सनल कंप्यूटर बना कर दिखाया ,जिसे देखने के बाद उन्हें पर्सनल कंप्यूटर के बिज़नेस करने का आईडिया आया |उन्होंने अपने इस आईडिया की शुरआत  अपने पिता के गेराज से की , जहा स्टीव और उनके दोस्त कंप्यूटर बनाया करते थे |

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एप्पल कंपनी की शुरआत कब हुई –

source- Facebook\google

स्टीव अपने दोस्तों के साथ मिलकर , कई ऐसे आविष्कार करते है की दुनिया इनको अब एक कंपनी के रूप में देखना चाहती है, 1976 में गेराज से शुरू हुई ये कंपनी अब , 1980  आते-आते एक विश्व प्रसिद्ध कंपनी बन चुकी थी  | और ये वक़्त दो बड़े ही दिगज कम्पनियो के फाउंडर का था , एक ओर स्टीव तो   एक ओर  बिल गेट्स थे  |

एप्पल कंपनी का नाम एप्पल क्यों पड़ा –

इसके पीछे का कारण  काफी छोटा है | स्टीव को फल खाना काफी पसंद था , और अपने गेराज में जायदातर फल ही खाते थे , और फल में उन्हें सेब काफी पसंद था , जिस वजह से  उन्होंने अपने कंपनी का नाम एप्पल रखा |

स्टीव को एप्पल कंपनी से क्यों निकला गया –

कैसा लगेगा जब आपकी खुद की बनाई कंपनी से आपको निकला जाए , यही कुछ स्टीव से साथ हुआ | दरशल स्टीव इतने बड़े कंपनी के निर्माता थे की उनकी कंपनी का नाम विश्व भर में प्रसिद्ध था , जिसकी अहम् वजह एप्पल के बेहतरीन प्रोडक्ट्स थे | स्टीव ने कभी अपनी प्रोडक्ट्स का कांसेप्ट दुसरो से छिपाया नहीं , इसी के चलते स्टीव को काफी नुकशान हुआ | क्युकी दूसरी अन्य कंपनी उनके प्रोडक्ट को बनाकर कम दाम में बेच देती थी | इसे के चलते स्टीव ने जब  एप्पल 3 और लिसा कंप्यूटर मार्किट में उतरा तो वह काफी बुरी तरह से नाकामयाब हो गया था  | इसे  देखकर एप्पल के सीनियर और उनके इन्वेस्टर्स काफी नाराज हो गए और उन्हें एप्पल कंपनी से निकालने का फैसला किया |

कैसे वापिसी की एप्पल में स्टीव जॉब्स ने –

स्टीव ने एप्पल से निकलने के बाद जल्द ही नेक्स्ट कंप्यूटर कंपनी स्टार्ट कर दी | वह कहते है ना की शेर के मुँह खून लगना | वही कुछ स्टीव के साथ हुआ | वह अपने सपनो को पूरा करने के लिए कभी  पीछे नहीं हटे | स्टीव ने जब कंपनी छोड़ी तो उनके साथ 5 और लोगो ने वह कंपनी छोड़ दी |  उन्होंने अपने इस कंपनी की शुरआत की और इसे भी बड़ी कोम्पनिओ  में शुमार कर दिया |जैसे ही एप्पल से स्टीव निकले वैसे ही एप्पल के बुरे दिन शुरू हो गये थे| वही स्टीव नेक्स्ट कंप्यूटर कंपनी को बड़ा करने में लगे थे | साल 1996 में स्टीव को एप्पल कंपनी ने उनकी   नेक्स्ट कंप्यूटर कंपनी  को खरीदने का प्रस्ताव रखा , जिसे की स्टीव ने 400 करोड़ से भी ऊपर में बेचा था |और फिर एप्पल कंपनी  ने उन्हें फिर से एप्पल का CEO बना दिया | इस दौर में एप्पल अपने बुरे दिनों से गुजर रहा था , इसी वजह से एप्पल ने फिर स्टीव को अपनी कंपनी में बुलाया | इसी तरह स्टीव ने एप्पल कंपनी अपनी वापिसी की |

एक वक़्त जब स्टीव नशे का सेवन करने लगे –

यह उन दिनों की बात थी जब स्टीव कॉलेज जाया करते थे  , वहा उन्होंने  कुछ नशीले पर्दाथो का सेवन करना शुरू कर दिया था , जैसे ही ये बात उनके पिता को मालूम हुई , उन्होंने स्टीव को खूब डांटा और नशीले पर्दाथो से दूर रहने को कहा , उसके बाद क्या था | स्टीव ने जीवन भर कभी भी नशे को हाथ नहीं लगाया |

स्टीव जॉब्स की पर्सनल लाइफ के बारे में जाने –

सन् 1991 में जॉब्स की शादी हुई उनकी पत्नी का नाम लौरेन पावेल था और उनके 3 बच्चे है। उनके 1978 में उनकी पहली बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम था लीज़ा ब्रेनन जॉब्स है। सन् 1991 में उनके लड़के का जन्म हुआ उसका नाम उन्होंने रीड रखा।सन् 1994 में उनकी बड़ी बेटी का जन्म हुआ बेटी का नाम एरिन है और सन् 1998 में उनकी छोटी बेटी ईव का जन्म हुआ। स्टीव जॉब्स की एक बहन है, उनका नाम मोना सिम्प्सन है।जॉब्स संगीतकार  दि बीटल्स के बहुत बड़े प्रशंसक थे और उनसे बहुत ज्यादा प्रेरित भी हुए। स्टीव 7 महीने तक भारत में रहे उन्होंने भारत की यात्रा करके अध्यात्म का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया और बाद में अमेरिका लौट गये। वहां जाकर उन्होंने बोद्ध धर्म को अपनाया और अपना सिर भी मुंडा लिया और वह भारतीयों की तरह कपड़े भी पहनने लगे।

स्टीव जॉब्स की मृत्यु कैसे हुई –

सन 2003 को उनको पेनक्रियाटिक कैंसर की बिमारी हो गई और 5 अक्टूबर 2011 को उनकी मृत्यु हो गई। दुनिया ने एक ऐसा व्यक्ति खोया जिसे कभी भूलाया नहीं जा सकता है | हमारे और आपके लिए स्टीव जॉब्स एक प्रेणा देने वाले  व्यक्ति है , और हमे उनसे प्रेणा भी लेना चाहिए | शायद मैं आपको इस एक पोस्ट से उनके बारे में नहीं बता पाया हूँगा , की उन्होंने दुनिया को चेंज करने में क्या भूमिका निभाई होगी | तो आपको उनपे बानी मूवी का लिंक दे रहा हु –

स्टीव जॉब्स मूवी यहाँ क्लिक करके देखे –
और है उनके बारे में जितना हो सके जाने, दूसरे ब्लोग्स को भी पढ़े –

यहाँ क्लिक करके आप स्टीव जॉब्स की स्पीच देख सकते है |

आशा करते है की आपको हमारा ये पोस्ट पसंद आया हो और अगर पसंद आया है तो कृपया एक कमेंट जरूर करे | थैंक्स Steve Jobs Success Story को पढने के लिए  |

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Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

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