Subhash Chandra Bose Biography In Hindi 2020

Subhash Chandra Bose Biography In Hindi 2020

subhash chandra bose biography-

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Source:-Google\Facebook

हेलो! कैसे हो फ्यूचर के सुपरस्टारों ….आशा करता हू की अच्छे होगे और लॉकडाउन का पालन कर रहे होगे |

निवेदन :- घर पर रहे , सुरक्षित रहे..

“तुम मुझे खून तो मैं तुम्हे आजादी दूंगा” जैसे विचारो से देश को आजाद करने वाले , एक महान देशभक्त  की बायोग्राफी आज हम पढ़ने जा रहे है | और वह महान देशभक्त और महान क्रन्तिकारी व्यक्ति “सुभाष चंद्र बोस” है | जी हां , एक ऐसे इंसान जिन्होंने अपने विचारो से ही देश में क्रांति ला दी थी , उन्ही की वजह से अंग्रेजो ने भारत छोड़ने का फैसला किया था , मैं यहाँ ये नहीं कह रहा हु की बाकि सब ने कुछ किया नहीं, नहीं मैं तो बस वह कह रहा हु , जो भारत के आजाद होने से पहले अंग्रजो की गुलामी में हमारे देश के प्रधानमत्री के पद पर थे | उन्होंने ऐसा खुद कहा था , की अगर सुभाष ना होते तो शायद हम हिंदुस्तान को आज़ाद ना करते |

उनकी देशभक्ति का आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते है की , उन्होंने अंग्रेजो के टाइम में सबसे मुश्किल परीक्षा जोकी आज भी देश की सबसे मुश्किल परीक्षा है  , UPSC यानि आईएएस की परीक्षा ना केवल पास कर बल्कि 4th ‘रैंक लाकर भी  , उस जॉब को लात मार दी थी क्युकी वह अंग्रेजो के लिए कभी काम नहीं करना चाहते थे | वह चाहते हो इतने बड़े पोस्ट को अपना कर बहुत ही अच्छी जिंदगी बिता सकते थे , पर उन्होंने ऐसा नहीं किया क्युकी  वह एक सच्चे देशभक्त थे |

तो चलिए जानते है एक सच्चे देशभक्त यानि सुभाष चंद्र बोस के बारे में –

हम सभी देश के लोग उन्हें नेताजी के नाम से भी जानते है | नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनुअरी , 1887 को उड़ीसा के कट्टक के बंगाली परिवार में हुआ था | उनके पिताजी का नाम जानकीनाथ बोस था , वही उनकी माताजी का नाम प्रभावती देवी था | उनके पिताजी एक वकील थे , जो ज्यादातर अंग्रेजो के लिए लड़ा करते थे | वही उनकी माँ ग्रहणी थी | नेताजी अपने 14 भाई-बहनो के परिवार में जन्मे 9वें  बच्चे थे | इतने भाई-बहनो के  बीच जन्मे  नेताजी बताते है की उन्हें  माता-पिता का ज्यादा लड़ प्यार नहीं मिल सका , जिस वजह से वह बहुत ही शर्मीले और खुद से ही ज्यादा बात करने वाले बच्चे बन गए थे | वह कई-कई घंटे अपने घरमे ही बिताते और घर में मजूद बहुत सारी किताबे पढ़ते थे |

यहाँ एक चीज आपको जननी चाहिए की जब नेताजी पैदा हुए थे , तो भारत में अंग्रेजो की हुकूमत हम भारतीयो पर इतने सारे जुर्म करती थी , की अगर कोई उनके काम ना आये तो वह उसे दिन -रात , जब मन तब मरते थे | यानि की बहुत अन्याय करते थे , पर वही उनके पिता एक जाने मने वकील थे इस वजह से नेताजी पर शुरू में तो कोई आपत्ति नहीं आयी थी |  उन्हें अंग्रेजो के बारे में अभी जानना बाकि था |

क्यों रात भर नहीं सोये सुभाष चंद्र बोस ?जानिए –

हां तो , हम आपको उनके शर्मीले स्वभाव के बारे में बता रहे थे , और कैसे वह कई-कई घंटे घर में ही बिता दिया करते थे ? इसी बीच उन्हें किताबे पढ़ने का ऐसा जुनून चढ़ गया की वाह आप दिन रात किताबे पढ़े लगे , जिस देख उनके माता पिता ने सोचा की , शायद अब हमे , सुभाष को स्कूल भेजना चलिए | ये फैसला लेने के बाद उनकी माँ ने उन्हें ये बताया की सुभाष कल से तुम स्कूल जाओगे , और ये खबर सुनते ही , मानो सुभाष किसी पक्षी की तरह आसमान में उड़ने लगे | वह पुरे घर में खुशी के मारे दौड़ रहे थे , यहाँ तक की वह उस रात सोये भी नहीं थे | उनकी इस खुशी के पीछे ये वजह थी की थी वह हमेशा अपने बड़े भइओ -बहनो को स्कूल जाते देख ,ये सोचते की काश , मैं भी स्कूल जा पता | और फिर वह दिन आया जब वह स्कूल गए, ये साल था 1902 का  |

 

 उनकी पढाई  के  बारे में ? जाने –

वह दिन आया जब, नेताजी पहली बार स्कूल जाने वाले थे | वह सुबह-सुबह ही तैयार होकर बैठे थे , की कब उन्हें स्कूल गाड़ी लेने आये गई , और वह स्कूल जाएंगे | ये देख उनके पिताजी बड़े ही खुश हुए | नेताजी जल्द घर के गेट के पास जाकर बैठ गए , और स्कूल गाड़ी का इंतज़ार करने लगे , थोड़ी ही  देर में , गाड़ी आई  और नेताजी मानो ऐसे  उस गाड़ी की तरफ भागे की वह किसी रेस में दौड़ रहे हो , इतने तेजी से भागने के चक्कर में नेताजी , बड़ी ही जोर से जमीन पे गिर गए और उन्हें बड़ी ही चोट लगी , लेकिन नेताजी मानो स्कूल जाने की खुशी में सब भूल ही गए थे , जल्द ही गाड़ी में बैठे और स्कूल पहुंचे |

नेताजी जब से स्कूल में आये तभी से वह सभी टीचरो के सबसे प्रसदीदा स्टूडेंट बन गए , वैसे भी नेताजी बचपन से ही पढाई में काफी होनहार थे | जिस वजह से उन्होंने अपनी 10वीं की परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया और जल्द ही वह 12वीं में भी ऐसा कर दिखाया | उसके बाद उनका एडमिशन कलकत्ता के बड़े ही  नामी कॉलेज में उनका एडमिशन हो जाता है और उस कॉलेज का नाम प्रेसीडेंसी कॉलेज ऑफ़ कलकत्ता होता है | जहा से भारत के कई महान इंसानो ने शिक्षा ली होती है , जैसे की डॉ सी.वि रमन और स्वामी विवेकानंद जी जैसे इंसानो ने |

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कैसे उनको इस  कॉलेज से निकला जाता है? चलिए जानते  है –

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दरअशल ये भी बड़ा ही अजीब सा किस्सा है की जो नेताजी बचपन से ही इतने शर्मीले थे वह कैसे एक बड़े लीडर बन कर लोगो का मन जीत लेते और उनमें देश के प्रति एक आक्रोश जगा देते | ये हुआ यु की उन्हें बचपन से ही किताबे पढ़ने का शौक था , उसी द्वारन उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी की एक किताब पढ़ डाली और उसके बाद वह पुरे मन से सिर्फ अपने देश और गरीबो की सोचते , जिस के बाद जब वह कलकत्ता आते है , तो वहा उन्हें हम भारतीयों पर हो रहे अत्याचारो  को देखकर बड़ा  ही दुःख होता है | जिसके बाद से ही वह इन सभी अंग्रेजो को देश भगाने का प्रण ले लेते है | वही से वह बिलकुल एक बड़े लीडर की तरह उभर कर आते है |

यहाँ  कॉलेज में आते ही उन्हें उनके भाषणों की वजह से जल्द ही कॉलेज स्टूडेंट का प्रेजिडेंट बना दिया जाता है | की तभी , उन्हें ये पता चलता है की , Mr. O नाम के एक  प्रोफेसर ने एक इंडियन स्टूडेंट को बेवज़ह ही मारा , जिसके बाद वह अपने कॉलेज के प्रिंसिपल के पास, जानकर उन्हें ये  है की , उस प्रोफेसर को  जल्द ही हम सभी स्टूडेंट से माफ़ी मांगनी पड़ेगी , नहीं तो , हम स्ट्राइक कर देंगे |

जिसके बाद वह प्रोफेसर माफ़ी नामा लिखकर सभी से माफ़ी मांगता है | पर उसी के कुछ दिनों बाद फिर वह किसी स्टूडेंट को पिट देता है ,  लेकिन इस बार कुछ स्टूडेंट भी उस प्रोफेसर को  पिट देते है | जिस के चलते , नेताजी को लीडर होने के नाते , उन्हें उस कॉलेज से निकाल दिया जाता है | उसके बाद कुछ दिनों तक वह सिर्फ गरीबो मदद करते है | उसके बाद फिर उन्हें कलकत्ता के ही एक स्कॉटिश चर्च कॉलेज से वह अपनी पढाई पूरी करते है |

कैसे की थी IAS की तैयारी ? जानिए –

दरअशल अपना कॉलेज ख़त्म होने के बाद , उनके ही बड़े  ने उन्हें कैंब्रिज जाकर पड़े करने को कहा था | क्युकी तब IAS की तैयारी सिर्फ और सिर्फ इंग्लैंड में हुआ करती थी , जिस वजह से वह इंग्लैंड जाकर रहे और वहा 7 महीनो में ही अपनी तैयारी पूरी करके , IAS का एग्जाम दिया | एग्जाम देने के बाद उन्हें लगा की एग्जाम अच्छा नहीं गया  है , और वह अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लगे , फिर रिजल्ट आया और उनके ही एक दोस्त ने बताया की आपका सेलेशन IAS में हो गया है , तो वह लिस्ट देखने गए तो उन्हें अपना नाम नहीं दिखा , की  तभी उन्ही के ही दोस्त ने बताया की नेताजी ऊपर देखिये , वहा ! आपका नाम टोपरस की लिस्ट में है | इसके बाद जल्द  ही वह घर आये , लेकिन उन्होंने अपने पिताजी से ये कहा की वह इन अंग्रेजो की नौकरी नहीं करेंगे |

 और उसके बाद से वह बिलकुल देश को आज़ाद करवाने में जुट गए | जिसके बाद उन्हें कई बार जेल तक जाना पड़ा , पर वह कहा हार मानने वाले व्यक्ति थे | उन्होंने अलग अलग देश जानकर ,  वहा के नेताओ से मिलते और उन्हें हमारा साथ देने को कहते | उसके बाद वह जर्मनी , रूस,जापान,मलेसिआ जैसे कई बड़े बड़े देश गए | वहा अपनी आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना की और वही उन्होंने “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा” का नारा सारे देश को दिया |

पर इस सबके बीच 3rd वर्ल्ड वॉर शुरू हो गई, जिस वजह से नेताजी को कुछ महीनो तक का इंतज़ार करना पड़ा | पर इसी बीच एक ऐसी रहस्यमई घटना हो जाती है , जिसे आज तक को सुलझा नहीं पाया | दरअशल इसी बीच ये खबर पता चलती है की नेताजी एक ऐरोप्लाने हादसे में मरे जाते है | जिसके बाद तो पूरा देश सेहम सा  जाता है | पर कई फाइल में मिले कुछ सबूत ये बताते है की नेताजी जिन्दा थे , उन्हें भारत में भी देखा गया एक गुमनामी बाबा के नाम से , वह देखे गए थे |

जानिए नेताजी के बारे में और भी – subhash chandra bose biography

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  • Full Name- Shubhash jankinath Bose
  • Nick Name- Netaji, Shubh
  • Born- 23 January, 1897(Orissa)
  • Parents- Jankinath Bose, Prabhavati Devi
  • Spouse\Wife- Emily Schenki
  • Children- Anita Bose Pfaff
  • Education- Raveshaw collegiate School, Presidency college , Scottish Church College, Cambridge
  • Qualification- B.A. in Philosophical science , IAS
  • Movement- Indian Freedom Movement
  • Political Ideology- Nationlism, Communism, Fascism-Inclined
  • Religious – Hindiusm
  • Publication- The Indian Struggle
  • Death- 8 August, 1945

जानिए नेताजी के बारे में कुछ बड़े ही इंटरेस्टिंग फैक्ट्स- subhash chandra bose biography

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  • नेताजी के 7 भाई और 6 बहने थी |
  • नेताजी स्वामी विवेकानंद जी और उनके गुरु रामकृष्ण प्रेम हंस को अपना गुरु मानते थे |
  • नेताजी कुछ सालो तक एक सन्यासी बनना चाहते थे |
  • नेताजी जल्लिया वाला बाग कांड के बाद से ही आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े थे |
  • नेताजी को 1921 से लेकर 1941 तक अंग्रेजो ने अलग अलग जेल में 11 बार कैद किया |
  • नेताजी को जेल में ही TB (tuberculosis) जैसी घातक बीमारी हो गयी थी |
  • नेताजी ने जेल में भी कई बार आंदोलन किये थे |
  • नेताजी अफगनिस्तान के रस्ते जर्मनी आये और फिर रूस गए |
  • नेताजी ने जर्मनी में ही शादी कर ली थी |
  • नेताजी ने बर्लिन में रहते हुए आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था |
  • नेताजी की भारतीय राष्ट्र कांग्रेस का दो बार अध्यक्ष भी चूना  गया था |
  • नेताजी ने ही सबसे पहली बार महत्मा गाँधी को “The Father of Nation: कह के बुलया था | ये उन्होंने रेडियो पर सभी भारतीयों को कहा था |
  • बापू भी नेताजी को अपना बेटा कहते थे |
  • नेताजी की मृत्यु ताइवान में ऐरोप्लाने हादसे में हुई | (कोई पुख्ता सबूत नहीं है)
  • नेताजी हिटलर से मिल चुके है |
  • नेताजी का ये नारा की “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा” ये नारा राष्ट्र नारा बन गया |
  • नेताजी जब जापान और जर्मनी से मदद ले रहे थे तो अंग्रेजो उन्हें मारने का हुकुम दे दिया था |
  • नेताजी ने ही “चलो दिल्ली” का नारा दिया था |
  • 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया।
  • नेताजी के पिताजी को अंग्रेजो ने रायबहादुर का किताब भी दिया था |
  • नेताजी के पिताजी उन्हें आईएएस बनते देखना चाहते थे |
  • 1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया तब कांग्रेस ने उसे काले झण्डे दिखाये। कोलकाता में सुभाष ने इस आन्दोलन का नेतृत्व किया।
  • जब सुभाष जेल में थे तब गान्धीजी ने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और सब कैदियों को रिहा करवा दिया। लेकिन अंग्रेज सरकार ने भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा करने से साफ इन्कार कर दिया।
  • सुभाष चाहते थे कि इस विषय पर गान्धीजी अंग्रेज सरकार के साथ किया गया समझौता तोड़ दें। लेकिन गान्धी अपनी ओर से दिया गया वचन तोड़ने को राजी नहीं थे। अंग्रेज सरकार अपने स्थान पर अड़ी रही और भगत सिंह व उनके साथियों को फाँसी दे दी गयी। भगत सिंह को न बचा पाने पर सुभाष गांधी और कांग्रेस से बहुत नाराज हो गये।

आखिर क्यों अंग्रेज उनसे इतना डरते थे ? जानिए – subhash chandra bose biography

ये बात शायद बहुत ही कम बार हम और आप लोगो ने सुनी होंगी की , नेताजी जैसे भाषण देते थे , उससे ना केवल अपने देश लोग प्रभावित होते बल्कि दूसरे के भी उतने ही होते , यहाँ तक की उस टाइम के हिटलर जैसे बड़े तानाशाह को भी वह अपनी बातो से जीत लिया था | हां माना की पहले , वह नहीं मने पर फिर हिटलर ने उन्हें रूस में खूब सरे पैसे दिए , जिससे की वह एक फौज बना सके | तभी सब अंग्रेज समझ  चुके थे की नेताजी ” दुशमन का दुशमन दोस्त ” वाला प्लान लेकर वह पुरे भारत को तो आजाद करवाते ही बल्कि और भी सभी एशिया से के देशो को भी आजाद कर वा देते | और जितना उन्होंने भारत को लूटा है वह सब वसूल कर लेते | जिसकी वजह से ही तो नेताजी के मरने की भी खबर सुनकर अंग्रेजो ने यकीन नहीं किया था |हम  देश की इस आजादी में उन्हें कभी ना भूले | ये कहकर हम आपको यही तक छोड़े जाते है |

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Anupjha

hello everyone i'm Anup i start my new career as blogger in 2020 i hope that you'll like my blog post. i want to say that i'll try to my best to get more information about my posts. thanks

This Post Has 2 Comments

    1. Anupjha

      dhanywaad aapka , aapka lekh bhi kuch km nahi hai..

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